Tuesday, August 30, 2016

अगर तुम्हारी “खोज” हूँ मैं,,,,,


अगर तुम्हारी “खोज” हूँ मैं,

तो तुम मेरी “उपलब्धि” हो।

चंद कदम जो साथ चलें,

वो जीवन की संपत्ति हो ॥ 

                अगर तुम्हारी खोज हूँ मैं ....

तुमसे मैंने कितना सीखा,

शब्द नहीं जो बयां करूँ ।

धन्यवाद से पूरी न हो,

तुम ऐसी परिलब्धि हो॥

                 अगर तुम्हारी खोज हूँ .....

जो ख्वाब हमने हैं देखे

संग मे पूरे करने को ।

उन ख्वाबों के भित्तिचित्र तुम,

हृदयांकित एक प्रसिद्धि हो ॥ 

          अगर तुम्हारी खोज हूँ ....

  

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