Wednesday, August 24, 2016

गम है !

तेरे जाने का गम है ! 
टूटन है ! घुटन भी है ! 
फिर भी, बेवजह न मुस्कुराए, 
तो बोल कैसे जिये अभी ! 
तेरे जैसा न कोई था कभी । 
और न है, अभी भी ।
फिर भी न गुनगुनाएँ,
तो बोल कैसे जिये अभी ।
तू मुझे भूलने को कहता,
मैं सबको भूल बैठा हूँ ।
फिर भी, न धर्म निभाएँ,
तो बोल कैसे जिये अभी ।
बहुत आसान है कह दूँ ,
तुम्हारी फिक्र है मुझको ।
तेरे यादों के साये से,
लिपटे हैं हम अभी भी,
फिर भी, न पुछे कौन है तू ,
तो बोल कैसे जिये अभी ।
------सौरभ

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