Monday, February 22, 2016

तेरी याद !

तुम्हारा जिक्र सुनकर क्यों 

सजग हो उठता है यह मन !

जैसे चौंक के जगता हो 


कोई बच्चा गहरी नींद से,!!


दोनों बाहें फैलाकर भागना

चाहता है तेरे यादों की गोद में !!

जितना भूलने की कोशिश करता हूँ

उतना ही जिद में चीखता है जोर से!!,

क्यों यह बच्चा हर दिन के साथ

और बच्चा बनता जाता है !

गोद में लेकर इसे देर रात तक,

फुसलाता हूँ, और यह तेरी यादों से

चिपटा सिसकर कर यूँ ही सो जाता है!
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--सौरभ 

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