Monday, February 22, 2016

इल्जाम पुरुष होने का !

हम पे इल्जाम है बहुत से ,
एक अपराध पुरुष शरीर होना भी है !
सन्देह के घेरे से हमें मुक्त नही किया जाता कभी,
और सहजता से मढ़ दिए जाते हैं अनगिनत लांछन
हमारे मूल स्वाभाव में भर देते हैं अपराध बोध ! 
हमारे अनुभूतियों को नाटकीयता का नाम देते हो!!
मानिये की जिंदगी की गाड़ी के दूसरे पहिये हैं हम
हम नहीं दोहराना चाहते इतिहास,
बदलना चाहते हैं खुद को ।
पर क्या वो मौका नही दिया जा सकता हमें !
क्या हम एक उम्मीदों की दुनिया नहीं बना सकते,
शोषण और तिरस्कार के बिना ।  smile emoticon
गलती सुधारने का तरीका जीवन में गलती न करने का संकल्प नहीं हुआ करता,
ये होता है एक दूसरे को गलती करने की आजादी देना ! एक दूसरे को सुनने और समझने की कोशिश करना smile emoticon
अजनबी बनकर हम घृणा तो रोक सकते हैं लेकिन मोहब्बत पैदा नहीं कर सकते smile emoticon
---सौरभ

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