Monday, February 22, 2016

अपने !

वो कौन हैं जो जल रहे खामोश रातों में अभी भी,

कैसा जुनूं उनका है जो आँखों से सबके बह रहा।।

किस किसने माना है कि उनको भी सहारा चाहिए,

जलते दीयों से तो यहां सबको उजाला चाहिए ।

ये देख लो फिर देर न हो,उम्र उनकी बढ़ रही,

गर हो सके तो साथ में,उनके भी बैठो प्यार से ॥  

--सौरभ

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