Tuesday, February 23, 2016

मिजाज अपना अपना !


तुमने मुझे अच्छा कहा,

तो बुरा उसने कह दिया। 

फिर किसी ने हमला बोला,

किसी ने तमाशा बना दिया ।

क्या महज हममे है बाकि

इतनी सी अब समझदारी ।।

तू जो पसन्द न मुझे तो तेरी

हर पसन्द से नफरत भारी ।।

कुछ नहीं है हासिल इससे,

इतना समझो यार मेरे तुम । 

सबकी अपनी ही थकान है,

सबके अलग झमेले हैं। 

सो बन्द करो,मत कोसो 

अब इनको तुम ! 

सबकी यहां अपनी दुकान है 

सबके अपने मेले हैं ।। 



--सौरभ

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