Saturday, August 3, 2013

माँ !

जब भी लगता है मुझे ,मैं सबसे बुरा हूँ,,
वो चुपके से कहती है, तू ही मेरा राजा है,,
मुझे जब भी लगता है, मैं हार जाऊंगा,,
वो आके कहती है, बस तू ही जीतेगा.. 
जब जब मेरा खुद पर, भरोसा नहीं रहता,,
वो कहती है, तुझसे बेहतर, कोई हो नहीं सकता,,
सोचता हूँ, कहाँ से पाती है वो इतना
उर्जा,विश्वास,धैर्य,, ! 
वो मुस्कुरा देती है, जैसे कहती हो..
तू बच्चा है और बच्चा ही रहेगा ! 
बांधना चाहता है शब्दों में माँ को,,
उसके प्यार को ! 
जब भी मैं ज्ञान,प्रेम को समझने में चूकता हूँ,,
उसकी छोटी सी बात सब समझा देती है,..
हाँ ! हाँ ! मैं बच्चा ही तो हूँ...और वही रहना चाहता हूँ..

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सौरभ--------


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