Monday, July 8, 2013

संवादहीन शिक्षा

"परिवार में दो बच्चे हों, वही परिवार अच्छा होता है !" सर की बात बीच में काटते हुए मोनू ने सर से पूछा, "सर ! तीन हों तो भी तो अच्छे होंगे न ! नहीं बेटा, दो और उनके दो ! वही अच्छा....
मोनू स्कुल से लौटते हुए रस्ते भर यही सोचता रहा... घर पहुंचते ही उसने अपनी छोटी बहन को जोर से धक्का दिया...वो पलंग से नीचे गिर गयी,,,,रोने लगी ! तमाचे के विरोध में वो चीखते हुए बोला, " दो बच्चे, सुखी परिवार ! ...माँ अवाक्, पिता हैरान !

**** शिक्षा में हठधर्मिता, हठधर्मीयों का ही निर्माण करती है..
--सौरभ----

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