Friday, May 3, 2013

उचित ---अनुचित


क्यों जरुरी है घर में दरवाजे,
खिड़कियाँ, परदे,,
जबकि घरहै वो,,
फिर किससे छिपना,,
और क्या छिपाना,,
जब सारे अपने हैं वो ! 
सब अनुचित है, उचित कुछ भी नहीं,,
मित्र ! ये परदे, खिड़कियाँ दरवाजे,
सब मर्यादा की रेखा हैं,,
जो सभी को देते हैं,,
एक स्वतंत्र निजत्व,एक अस्तित्व,
जिससे होती है मजबूत बुनियाद 
हर सम्बन्ध की,,
इसलिए अनुचित कुछ भी नहीं,,
सब उचित है,,साथ ही इनसे ही बढती है 
खूबसूरती हर घर की,,
और मजबूती भी...
-                            ------सौरभ---

1 comment:

Prashant Suhano said...

बिलकुल सही कहा...
सार्थक कविता..