Friday, January 18, 2013

अक्ल का परदा


सुनसान सड़क पर दो सज्जन कुछ तकरार कर रहे थे,,,,शायद एक लड़का और लड़की थे,,,
लड़की ने नाराज होते हुए कहा,,,,मैं लड़की हूँ,,,,तुम मुझे फोन क्यों नहीं करते,,,,
लड़के ने अकड़कर कहा,,,,तुम लड़की हो तो !  क्या लड़का ही फोन करेगा ? ये कहाँ लिखा है ?
प्यार में लड़का/लड़की कहाँ से आ गया। इतना कहकर लड़का कुछ दूर बिना पीछे देखे चला गया,,,,,
लड़की मुंह फुला के वहीँ बैठ गयी,,,और बुदबुदाने लगी ,,, मैं लड़की हूँ,,,अबला/ कमजोर,,मुझे हमेशा से सताया गया है,,,मेरी परवाह कोई नहीं करता,,,,,  
रोने की आवाज सुनकर एक (चिरकुट) राहगीर से रहा न गया,,, 
राहगीर : तुम कौन हो ?
लड़की: तुम अन्धे हो ,,दिखाई नहीं देता।  मैं लड़की हूँ। 
राहगीर  : अच्छा ! जान गया,,,,तुम मानती हो की तुम लड़की हो,,,
लड़की : मतलब ?
लड़का : मैं तो अँधा हूँ। तुम अक्ल की अंधी हो,,,,

" लडकियाँ पैदा नहीं होतीं,,,,बना दी जातीं हैं"( समाज के द्वारा ) 
तुम एक इन्सान हो बस,,,,उतना ही जानो और मानो,,, 

"जा  जिन्दगी को जी ले कुछ इस अदा के साथ,,,
ज़माने से न कोई गिला कर , न उस खुदा के साथ,,"

वो लड़की चौंकर उस राहगीर को देखने लगी,,,,,,उसे लगा ये सारे भ्रम उसके खुद के बनाये हुए हैं,,,उसके आंसू मुस्कुराने लगे,,,,सच ! ये सारे बंधन तो उसके सोच/दिमाग  की उपज है,,,कितनी जल्दी वो खुद को मुक्त समझने लगी,,,,उसने हँस कर ,,,राहगीर का धन्यवाद किया ,,, 
लड़का छिप कर ये सब देख रहा था,,,वो दौड़ता हुआ वापस आया,,,और बोला  चलो ,,पता नहीं किस किस से यूँ ही बात करने लगती है,,,,और संशय भरी नजरों से राहगीर को देखा,,,, 
लड़की ने लड़के से बड़े प्यार से कहा , " तुम सही थे !" तुम जानते हो मैं थोड़ी बेवकूफ हूँ,,,,
जिस वक्त जिसे भी याद आ जाये वो फोन करेगा,,,,,और किसी तरह भी बात करने के रास्ते तलाश लेगा,,,
" प्रेम की ताकत विश्वास है," जो बिना खुद पर हुए एक बोझ बन जाता है,,,,
लड़का अपना सर खुजलाते हुए बोला " अचानक इतना ज्ञान ! " लड़की ने हंसकर कहा , ये यही समझा रहे थे,,,,लड़के ने सर झुकाकर नमस्कार किया और कहा आज आपने मेरी जिन्दगी में खुशियों और समझदारी के बीज रोप दिए,,,(और उम्मीद करने लगा अब सज्जन जाएँ) राहगीर ने दोनों को नमस्कार किया .
... राहगीर के चेहरे पर एक मुस्कान थी, जो लड़की को देखकर बरबस ही आ गयी,,,,,,,,लड़का परेशान न हो,,,इसलिए वो राहगीर चल पड़ा ,,,,,कहीं और/किसी और की अक्ल  से पर्दा उठाने ...
.यहाँ तो उसका पर्दा गिर चूका था,,,

1 comment:

Prashant Suhano said...

वो राहगीर कहीं मैं तो नहीं था..?? जरा गौर से देखिए सौरभ भाई..
:)