Sunday, December 16, 2012

तीन तरह के लोग..


'सुनो बेटे !" दुनिया मे मुख्य रूप से तीन तरह के लोग होते हैं।
       पहले वो जो कोई काम नहीं करते। उन्हें बनाकर  ईश्वर अपनी गलती पर पछताता है और ईश्वर उनके जीवन में मज़बूरी में बार बार आके उनके काम कर देता है। ऐसे लोग खुद के भाग्यशाली होने की डिंग हांकते हैं, और ईश्वर इनके बचपने पर हँसता है ।

       दूसरे वो लोग होते हैं, जो खूब मेहनत करते हैं। ऐसे लोग अपने काम गिना गिना कर ईश्वर से उसके बदले कुछ बेहतर मांगते रहते हैं। मोटे शब्दों में इनके पास बहीखाता होता है जिसमे हर दिन की की गयी अच्छाई को वो खुद नोट कर रहे होते हैं, इसलिए अशांत होते हैं। ईश्वर ऐसे लोगों के बचपने पर मुस्कुराता है। 

       तीसरे किस्म के इंसान वो होते हैं, जो केवल मेहनत करते हैं।  वो कोई भी काम बिना किसी स्वार्थ, किसी ख्वाहिश के करते हैं, उनको इससे फर्क नहीं पड़ता की सामने वाला उनका इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे लोग ईश्वर को अपना  सब कुछ सौंप चुके होते हैं। ये लोग मस्त (फक्कड़) किस्म के होते हैं, इन्हे हिसाब करने की फुर्सत नहीं होती। ईश्वर ऐसे लोगों को बना के खुश हो जाता है। ईश्वर बार बार ये चाहता है,  ये कुछ भी मांग लें, कुछ भी, और ऐसे लोगों को जब तकलीफ होती है न, तो उस ऊपरवाले के भी आँसू निकल जाते हैं।     

       'पापा' ! इसमें सबसे अच्छे कौन से लोग होते हैं?
बेटा ! तीसरे किस्म के लोग उस विधाता के  सर्वोच्च कृति होते हैं। यही संसार की धुरी होते हैं, इन्ही के कारण संसार में धर्म (अच्छाई ) जिन्दा रहती है।

       अच्छा पापा ! मैं इनमे से कौन सा हूँ ?  या मुझे कौन सा रास्ता चुनना चाहिए, जो मेरे जीवन को सरल और आनंद से भर दे ? 
'बेटे !'  तुम्हें  एक खास किस्म की चौथी प्रजाति से होना चाहिए।
       अब ये कौन सी प्रजाति है, पापा ?
       'बेटे!'  ये प्रजाति अभी नयी है, इनके विकास में थोडा वक्त लगेगा और वो है 'प्रेक्षक'। ऐसे लोग तीनों तरह के लोगों का अध्ययन करके अपना रास्ता तय करते हैं ये लोग सोचते है, हर घटना/परिघटना को नए नजरिए से, पूर्वाग्रह से बिलकुल मुक्त होकर। ये भावावेश मे निर्णय नहीं लेते और न ही बिल्कुल भावशून्य होके। ये सम्मिश्रण होते हैं, निश्छल हृदय और सतर्क मस्तिष्क के।   
       बेटे ! ऐसे लोग जानते हैं, सच्चाई हर रस्ते में हैं, सच्चाई(अच्छाई) विरोधी नहीं होती। बल्कि ये उसी एक मंजिल तक पहुँचने के अलग अलग पड़ाव हैं जहाँ जाना सबका लक्ष्य है। 

4 comments:

Manish Yadav said...

:) :) अभी इन्सानों का भी periodic table बनने वाला है.
आजकल जरा हमारी खोपड़ी नाना प्रकार के इन्सानों में उलझी है, नहीं तो यह शुभकार्य आपके साथ मिलकर जरूर पूरा करता. :D

Arun Vishwakarma said...

acchhi analysis thee.....kaafi kareeb

saurabh said...

शुक्रिया अरुण भाई......

saurabh said...

मनीष भाई.....आपके सहयोग के बिना ये पूरा नहीं हो पायेगा....इसलिए हम आपका इन्तेजार करेंगे....फिर साथ में ही समाधान निकालेंगे........