Wednesday, December 19, 2012

एक लड़की...


उस लड़की को देखा था। एक लट उसके चेहरे पर बार बार आती वो उसे हलके से हटा दिया करती थी। अपने कोचिंग में पढाते वक्त राकेश  ने देखा था उसे ! और उस लड़की को ये भी पता नहीं था कि उसे कोई चोर नजर से देख रहा है। उसके गालों में पड़ने वाले गड्ढे कितने खूबसूरत लग रहे थे!  बहुत गोरी भी नहीं थी और न ही उसने ऐसे कुछ पहन रखा था । उसके साँवले चेहरे में कितनी चमक है । खुले बाल उसके, ऐसा लगता था जैसे उसे ही देखने की आरजू थी मन में।
इन सभी रोमांटिक विचारों  में उलझा राकेश शाम के वक्त घर जा रहा था।  आज उसे पापा ने लड़की देखने के लिए कहा था। व्यवस्थित विवाह का अपना क्रेज होता है। राकेश जब मिला उससे तो देखते ही रह गया। अरे ये तो रश्मि है इसे ही तो देखा था उसने ! उसने पहले पहल ही मान लिया की ये बहुत तेज होगी, पढाई में ! वास्तव में व्यक्ति जो बनना चाहता है, उसे हर जगह अच्छी चीजों  में अपनी कल्पना पूरी होती दिखती है।
               वो गांव से बाहर निकला ही था की उसे एक लड़की दिखी जो अभी शाम के वक्त पैदल ही घर जा रही थी। सोचा था उसने उसे घर तक छोड़ दे, लेकिन लोग क्या सोचेंगे और खुद वो क्या सोचेगी। बस यही सोच के उसने उसके साथ साथ अपनी साईकिल लगा दी थी। उस लड़की को भी सुरक्षा का एहसास हुआ था। और एक मुस्कान के रूप में उसने धन्यवाद दिया था उसे। वो पहला अनबोला संवाद था उन दोनों का । रश्मि  सोच रही थी कितना गलत सोचती थी लड़को के बारे में ! आज उसे लग रहा था। इस उम्र के लड़के उतना सोच भी नहीं पाते जितना उसे समाज में दिखने वाले बुजुर्गों कि हरकतों से डर लगता था।
कल राकेश नहीं जा पाया था, अपने कोचिंग। तबियत कुछ खराब थी। दूसरे दिन उसे पता चला था कि रश्मि को कुछ लोगों ने उठा लिया है। बाद में पता चला एक रात वो वापस आ गई थी ।
उसने हिम्मत करके पूछा था, की क्या हुआ था तुम्हारे साथ ? ठाकुर की करतूत सुनके उसके तन-बदन में आग लग  गई थी। वो आग बबूला होकर ठाकुर को मारने के लिए निकल पड़ा था। उस लड़की से तो अब तक कोई रिश्ता भी नहीं था उसका। लेकिन ऐसे वक्त पर संस्कार ही काम आते हैं वही इंसान को दिशा देते हैं निर्णय लेने कि शक्ति देते हैं। बहुत मारा था ठाकुर के लोगों ने कुछ कटु वचनों से कुछ अपनी बूट से। उसके दद्दू ने समझाया था, तुम कुछ नहीं कर सकते इनका ! क्योंकि तुम गरीब हो ! तुम्हारा सबसे बड़ा अपराध यही है कि तुम गरीब हो। इंसाफ जैसी बातें केवल किताबों में होती हैं !जो हुआ उसे भूल जाओ ! आगे नयी जिंदगी शुरू करो !
दद्दू के अनुभवों ने उसे नयी दिशा दी थी। रश्मि से उसने शादी कर ली । उसने बहुत कोशिस कि रश्मि उस घटना को भूल जाए। खुद रोज भूलना चाहता था वो ! लेकिन नहीं हो पता था। एक अनचाहे साये के रूप में ठाकुर के शब्द गूंज जाते थे उसे कानों में !.शब्द इंसान कि शक्ल ले के खड़े हो जाते थे। उसे बार बार फ़िक्र होती थी रश्मि कि जिसपर गुजरा था ये सब !
आखिर गलती किसकी थी उसकी ?? "वो गरीब था" उस शाम वो चला गया होता तो शायद ये नहीं होता, या रश्मि की गलती थी कि वो लड़की थी ? उसे लग रहा था जिसे पहली बार देखकर उसने ऊपर वाले को खूबसूरत दुनिया  बनाने के लिए धन्यवाद दिया था ! लेकिन ठाकुर को कोई सजा क्यों नहीं देता ??
रश्मि के आंचल के आँसू आज तक नहीं सूखे। राकेश  आज भी उन खामोश चींखो को सुनता है । कोर्ट में अब भी तारीख पड़ती है। कुछ नहीं बदलता लेकिन जब भी कोई दुर्घटना घटती है किसी लड़की के साथ वो अवसाद में आ जाता है। उसे अपने अंदर कुछ टूटता सा महसूस होता....जब किसी बच्ची को हँसते देखता तो उसे अपना जीवन सार्थक लगने लगता......
आज भी उसकी जंग छिड़ी हुयी है उस खुदा से जिससे लड़ने के लिए उसके पास ऐसा कोई हथियार नहीं है। .वो आज भी पूछता है कि तुम ही अगर सब बनाते हो !  सब तुम ही करते हो, तो फिर ऐसे इंसान बनाते ही क्यों हो? क्यों नहीं मिटा देते..???.और जबसे रश्मि को भी खुदा ने छीन लिया ! वो चुनौती देता रहता है उस खुदा को ! बस एक लड़की कि खातिर, जो अब नहीं है ! और जिसके बिना उसके जीवन में कुछ बचा भी नहीं! कुछ भी नहीं!
कल मिला था मुझसे ! वो जीना नहीं चाहता । उसके पास कुछ सूखे आँसू, कुछ खामोश चींखे और कुछ अनुत्तरित सवाल हैं। जो उसने इस नयी पीढ़ी को सौंप दिया है। और यह उम्मीद जताई है कि शायद हम उसके जवाब ढूंढ सकें।
                              -------सौरभ