Saturday, December 15, 2012

आईना ...



ये दुनिया आईना है मित्र...सबको उसकी सूरत दिखाती है....यार इस दुनिया में आईने की जरुरत क्या है? मुझे तो लगता है लोगों का खुद से विश्वास उठ गया है...अब अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए भी इसके मोहताज हो गए....
दूसरा मित्र: नहीं मियां आईने तो हमें हमारी हकीकत से रूबरू करते हैं...हमारा विश्वास बढ़ाते हैं हमारी खूबसूरती का एहसास दिलाते हैं.......और ...और सच पर आपका भरोसा पक्का करते हैं....
पहला मित्र मुस्कुराते हुए बोला तुझे समझाना पड़ेगा....देख भाई ...वो लड़की जो सामने बैठी है न बहुत अक्लमंद है ...वो भी अपनी तारीफ सुनकर खुश हो जायेगी.....और देखना बदले में तेरी भी तारीफ करेगी....इंसानी फितरत है यार...वाही लौटाता है जो मिलता है...और इसके लिए भी आएना ही जिम्मेदार है....लेकिन याद रखना कोई यदि तेरी तारीफ कर रहा हो और तू उस पर ध्यान न दे फिर देखना क्या होता है...?? ..नहीं यार देख तो कितनी तेजी से “आप बहुत अछे हैं, आप बहुत ध्यान रखते हैं, बहुत केरिंग हैं...इतना कोई एक साँस में रटकर तो नहीं बोल सकता ..उसका दिल बहुत साफ है...इसलिए वो ऐसा बोल रही है....”
“उससे भी तेजी से तुझे गलियां निकालेगी “...
जो जितनी तेजी से पास आता है उतनी तेजी से दूर भी जाता है....
देख भाई “शब्द ऐसे ही नहीं अपने अर्थ खो रहे हैं..... मित्र....
इस शीशे ने दुष्टों के साथ दुष्टता का व्यवहार करना सिखा दिया...अर्थात प्रतिक्रिया देना वो भी सामने वाले की मर्जी से ...हमारे मन की शांति इस शीशे ने हर ली है यार......ये दुनिया अब शीशे की हो गयी है....जो प्रतिक्रिया पर चल रही है....”वो जब तक नहीं बदलेगा मैं भी नहीं बदलूँगा.”..
दूसरे मित्र ने कहा .....समझ गया मित्र....हमारी संस्कृति ‘दुष्टों के साथ प्रेम का व्यवहार करने की क्यों रही.??
.” असली परिवर्तन प्रतिक्रिया देने से नहीं बल्कि सोच समझ के प्रतिक्रिया देने से आयेगी ...और तब शब्द अपने अर्थ भी नहीं खोयेंगे...उनके कुछ मतलब होंगे और जिनसे संवेदनाओं का प्रेषण हो सकेगा....सच में तुने आएना दिखा दिया यार......

2 comments:

Manish Yadav said...

आइना अब सही चीजें दिखा रहा है. :) ऐसे ही देखते और दिखाते रहिये.

saurabh said...

शुक्रिया....