Sunday, October 21, 2012

कुछ गीत, कुछ कविता...


पिछले कई महीनो से समयाभाव के कारन ब्लॉग  अपडेट नहीं कर पा रहा था....
फेसबुक के माध्यम से कुछ पंक्तियों में अपनी बात कहने की (विशेस अवसरों के विशेष भाव) कोशिस कर रहा था....
आज उन सभी को एक साथ रखने की कोशिस की....एक जगह कम से कम सारे मिल जायेंगे....
(विशेष व्याख्या प्रतेक गीत/मुक्तक  की आप सभी फेसबुक पर पढ़ते ही हैं..... 


1."ठोकरों से सिखने की ठान ली हमने...
अब अँधेरा भी कुछ मायने नहीं रखता..."

2.  "मिलते हैं रोज सबसे, खुलते किसी किसी से...
खुलते हैं जिससे मिलकर, वो मिलते कभी कभी हैं..."

3. "कुछ नया सीखूँ, या सब कुछ भुल जाऊं मैं....
बड़ी कश्मकस में हूँ, किस राह जाऊं मैं...."

4. "ख्यालों के मकान हमने, इतने ऊँचे बना लिए...
की उनमें आज भी कोई, रहने नहीं जाता .."

5. "पुराने जख्म लेकर के, भला हम कब तलक भटकें....
जिन्दगी रोज यहाँ नए रूपक* दिखाती है..."

6. "मुझे जिस रूप में चाहोगे, वैसे ही मिलूँगा आकर ...
हूँ तो आखिर आईना, कितना बदल जाऊंगा..."

7. "तुझे हम ना नहीं कहते, ना ही कह पाएंगे कभी..
पर तेरी नहीं हम प्यार की, इज्जत बचा रहे हैं.... 

लोगों का एतबार कहीं उठ न जाये, प्यार से...
इसीलिए ख़ामोशी से तुझे ढोए जा रहे हैं..."

8. "उसे समझते थे कुछ और, वो कुछ और ही निकला...
गुस्सा करूँ किसपे, ये समझ नहीं आता...

बहुत मुश्किल होता है, किसी को ना कह पाना....
खासकर तब, जब वो प्यार का चेहरा लगा के पूछे..."

9."ऐसा हो कभी की तू, मुझे समझ सके...
इसी इन्तेजार में, खुद को जलाये बैठे हैं..."

10. "जितना जाना तुझको, तेरे जितने करीब आये....
हमें, पहले से दूर ..तुम बहुत दूर नजर आये....

पता नहीं तुझसे कभी मिल भी पाएंगे....
या फिर एक ख्वाहिश, बेमौत मरेगी...."

11. "उम्मीद करना हमारी आदत है और अब मज़बूरी भी...
लगता है जिंदगी अब, वफ़ा की उम्मीद में ही कटेगी...."

12. "खुद के बनाये नियम, कभी कभी तो तोड़ दे...
जिंदगी खुश होने के मौके , कभी कभी ही देती...."

13. "खुदा तेरी खुदाई की , अजब ये दास्ताँ देखी...
लवों पे दी गर मुस्कान, तो आँखों में दिए मोती...
करिश्मा रहमतों का तेरी क्या खूब चलता है...
दवा देता है या तू दर्द, न मालूम चलता है..
उसी के साथ है चलना , उसी के साथ है हँसना ....
कहा था जिसने कभी हमको, तेरी सूरत ( नियत) नहीं अच्छी..."

14. "घबडा नहीं जो अब तलक, रास्ते नजर आये नहीं...
शुक्र कर इस बात का , तुझे मंजिल की खबर है..

15. मुझको तेरे जूनून पर पूरा यकीं है हो चला ...
मंजिल तेरे पाँव से लिपटकर जरुर रोएगी....

16. "तुझमे हुनर, तुझमे अकल है...
पर इतना एहसान करना खुद पर...
जब भी कोई कुछ भी कहे .. 
तो थोडा विनम्र होना तू...

मैं ये नहीं कहता की सारी बातें उनकी मान ले.... 
वे तुझको अपना वक्त देते , इसका ही एहतराम कर..."

17. "चरों तरफ की तुने, दीवार ऊँची कर ली...
और अब है ये शिकायत,मुझे दीखता कुछ नहीं...

18. " खुद के बनाए जाल से लो मैं निकल गया..
गिरते गिरते ही सही देखो, मैं फिर संभल गया...
ये माना इसमें डर लगा, दर्द भी हुआ थोड़ा...
बेचैनियाँ हुयीं, तनहाईयाँ मिली, भटका भी मैं थोड़ा..
तेरी दुआओं का जादू देख फिर से चल गया...
बीते कल के साये से मैं फिर निकल गया....

गिरते गिरते ही सही देखो, मैं फिर संभल गया.."

19. "जो कुछ तुझे मिला है, लडूं मैं उसकी खातिर.
बेहतर है शुक्र करना, जो कुछ मुझे मिला है ..."

20. "हमने अब तक यही समझा भरोसे को मोहब्बत कहते हैं...
पर यहाँ "शक" करने को मोहब्बत कहने लगे हैं लोग.....

हमने अब तक यही जाना, मोहब्बत मुक्त करती है...
बन्धनों में कसके बांधने को, मोहब्बत कहने लगे हैं लोग..., 

21. "दिन जिंदगी के अपने, कुछ इस तरह से कटते...
कभी तुझको याद करते , कभी तेरा इन्तेजार करते...

22. "आओ अपने बीच कुछ खामोशियाँ भी रहने दें...
'कुछ' तुम, समझकर खुश रहो, हम 'कुछ' समझकर खुश रहें....

(सौरभ )

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