Tuesday, October 30, 2012

प्रार्थना


प्रार्थना:

माँ  हमको  इंसान  बना  दे , प्यारी  सी  संतान  बना  दे।
सबके  दिल  में  बसने  वाले , तू  प्यारे  अरमान  जगा  दे॥
माँ  हमको  इंसान  बना  दे ,,,.......
माँ  हमने  ये  जान  लिया  है , सच  को  अब  पहचान  लिया  है।
इन क्षेत्रवाद  के  नारों  से,  नहीं  सियासत चलने देंगे।
नफरत के इस चक्रव्यूह मेंमोहब्बत का पैगाम दिला दे॥
माँ हमको इंसान बना  दे ....
हमको सिन्धी  गुजराती, नहीं मराठा बनना है।
सबके दिल में फिर से वो, प्यारा हिंदुस्तान बना दे॥
माँ हमको इंसान बना  दे................
राम ,कृष्ण ,गौतम की धरती पे हमने है जन्म लिया।
कर्ण ,दधिची ,जनक के किस्से सुनकर है बचपन ये पला
याद  हमें फिर भूला , वो गौरव सम्मान दिला दे
माँ हमको इंसान बना  दे......
टैगोर ,तिलक  गाँधी को हम, अपना आदर्श बनायेंगे।  
आजादभगत की क़ुरबानी को अब ना कभी  भुलायेंगे।।
माँ तुझसे ये वादा है ,अब कभी ना तुझे रुलायेंगे।  
जाती धर्म मजहब के नाम पे  कभी ना खून बहायेंगे
बस हमको इंसान बना दे, प्यारी सी संतान बना दे॥
माँ हमको इंसान बना  दे ......
      ---(सौरभ)

नोट: ये प्रार्थना सामाजिक परिस्थितियों के बदलते स्वरुप को पूर्ण समर्पण के द्वारा बदलने का प्रयास है।   

साथ



हमारा साथ न जाने क्यों अधिक चल न सका ?
तू “घुल” न सका शायद, और मैं “मिल” न सका॥

हमने तो साथ चलने की बहुत कोशिस की।
तू रुक न सका शायद, और मैं चल न सका॥

हमें आज भी याद है, की गयी वो बेतकक्लूफ बातें।
जो कुछ तुझको चुभी शायद, और मैं भूल न सका॥

हमारा साथ न  जाने क्यों अधिक चल न सका ?
तू घुल न सका शायद, और मैं मिल न सका॥


                                -----(सौरभ)





सीख लिया:



मतभेदों को साथ मे लेकर, हमने चलना सीख लिया।
आँखों मे आँसू लेकर के , हमने हँसना सीख लिया॥

अब तेरी खामोशी को भी, हमने सुनना सीख लिया।
चुप रहकर बेबाकी से, सब कुछ कहना सीख लिया॥

हमको अब तक डर लगता था, अक्सर तनहाई से।
जाने क्या बात हुयी है, तनहा रहना सीख लिया॥  

अपने आँसू पी-पी कर के, हमने जीना सीख लिया।
रोती आँखों से आँसू को, हमने चुनना सीख लिया।। 

इस मतलब की दुनिया में, अब रहना हमने सीख लिया। 
अब बेमतलब की बातों पर, हमने भी हँसना सीख लिया ।।

मतभेदों को साथ मे लेकर, हमने चलना सीख लिया।
                                           -----(सौरभ)