Thursday, September 8, 2011

दोस्त...

जब से मुझमे तू शामिल हुआ 
तेरी खैर ही मनाते रहे हैं..

बुरी नजरो से बचाने की खातिर,,
तुमको अक्सर समझाते रहे हैं

तुझे रोक भी न पाए चोट खाने से
साथ रहके बस आंसू बहाते रहे हैं

क्या प्यार करना खता थी हमारी.
अफ़सोस के आंसू...सुखाते रहे...

कैसे बांधा है तेरी मोहब्बत ने हमको...
दर्द पाकर भी मुस्कराते रहे हैं...

Monday, September 5, 2011

रिश्ते...

रिश्तों   की   उलझनों को सुलझाते रहे हैं हम..
फिर भी क्यों धोखा  आज तक  खाते  रहे हैं हम

रिश्तो  की कीमत  को कभी  हमने  नहीं  आँका 
रिश्तों को अब  तक "हिसाब" से  बचाते  रहे हैं हम

रिवाजों   से भरी  दुनिया  में,  शिकायत  कभी न  की
"मासूम  आंसू"  इस  तरह  छिपाते  रहे हैं हम..

Thursday, September 1, 2011

हमने सीख लिया....

हमने सीख लिया....

प्यार में जीना सिख लिया, प्यार में मरना  सिख लिया ...
देख ले तेरे प्यार में साथी, क्या क्या हमने सिख लिया

मतभेदों को साथ में लेकर, जीना हमने जीना सिख लिया
आँखों में आंसू लेकर, हँसना हमने सिख लिया

डर लगता था अब तक , हमको अक्सर तन्हाई से...
जाने क्या बात हुयी है, तनहा रहना सिख लिया

अब तेरी खामोशी को, हमने सुनना सिख लिया
चुप रहकर बेबाकी से, सब-कुछ कहना सिख लिया

प्यार में जीना सिख लिया, प्यार में मरना  सिख लिया ...
देख ले तेरे प्यार में साथी, क्या क्या हमने सिख लिया