Tuesday, February 22, 2011

उसकी बातें..


 लफ्जों में कहाँ बयां, होती है मोहब्बत की हकीकत.
जो देखे मुझको न , समझो वो मुहब्बत क्या है?

 लफ्जों में अगर एहसासों की खुशबूं ही न हो तो..
वो लफ्ज बस एक, लफ्फाजी ही होती है..

इतना दर्द है उसके हंसने में अब भी..
देखके उसको सभी पलकें भिन्गोते हैं.

अश्कों से भरी बोझिल पलके यूँ असर कर गयी..
दिल की एक चाहत थी ,जो दिल में घुट के रह गयी.

 दिल में आज फिर एक हुक सी उठी..
कुछ उसकी आरजू पे , कुछ अपनी बेबसी पे..

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