Monday, February 21, 2011

नया पन


नयी दुनिया , नयी राहों से मैं रोज मिलता हूँ.
नया कुछ सिखने की खातिर मैं रोज चलता हूँ.
नयापन चाहना मेरी कोई खता ना बन जाये..
इस बात से डरता संभलकर रोज चलता हूँ.

आज तक पाया नहीं कुछ भी नया मैंने
वही नए लिफाफे में सारे ख़त पुराने हैं..
वही मिलने  के गीत है, वही खोने का दर्द है
वही चिंता पुरानी है, वही पुरानी  कहानी है

नया कुछ खोजते रहने की  बस आरजू थी मेरी.
नया कुछ करते रहने की बन गयी अब आदत मेरी..
नया पन जब नहीं मिलता , खुद से खूब लड़ता हूँ.
नया पन ढूढने में ,अब  पुराना हो गया हूँ मैं .

वही तल्खी वही बातें वही गुरुर आ गया, 
जिससे बच के निकलने को मचलता रहा हूँ मैं..
नयापन नहीं होता नजारों में मेरे साथी./.
हमारे दिल की धडकने उसे नया बनाते  है.
.
मोहब्बत ही है इक जरिया जो इंसा बनता है, 
इस एक सच को जो शख्स  जान पाता है. 
वाही इस दुनिया के नयेपन को पहचान पता है..
वही हर बात पे हँसता और हंसता है...
वही सब के दुःख दर्द को अपना  समझता है..
उन्हें दूर करने की कोई तरकीब खोजता है...

इस तरह वो खुद इक नयी फिर मिशाल बनता है...
उसी के नाम पे दुनिया में फिर मशाल जलता है.....

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