Tuesday, August 10, 2010

माफ़ करना..

साथियों ये लेख मैं अपने भविष्य में होने वाली गलतियों के लिए लिख रहा हूँ......

जब मैं आपके प्यार को आपकी खुशामद का नाम  दे  दूँ..
जब मैं आपके दिए  सम्मान को डर का नाम दे दूँ..
जब खुद की तारीफ करने में मैं आपकी निंदा करने से भी न चुकून
जब कभी मैं इतना बोल जाऊं   के आपको रुलाने में भी न संकोच करूँ,,
और फिर  आपके आंसुओं  को भी नाटक कह दूँ...
और उपहास करता हुआ  चल पडूं ,अपने ही ख्यालों में..

कभी  जाग जाये मेरा अहंकार , और  कर दूँ आप पे वार..
जब मैं आपको स्वार्थी कह दूँ..जब की मैं डूबा रहूँ खुद अपने आप में..
जब मैं छोटी छोटी बातों में खीज के आपको दुत्कार दूँ
जब मैं किसी की आँखों की गहराई में इतना डूब जाओं की
आपके होने का अभाश भी न हो मुझे,,,
जब मेरी परेशानी इतनी बड़ी हो जाये की,
आपकी बात सुनने का वक़्त न निकाल सकूँ
और फिर आप पे ही  इसका भी   इलजाम दे दूँ

जब मेरा दिल टूटे , भ्रम न रहे कोई.
जब  सभी लगे  अपने  बेगाने ..जब मैं होके उदास बैठूं..
जब दुनिया में कोई मेरा साथ न दे..जब सबसे अकेला हो जाऊ..
जब खुद से इतना उब जाऊ की जीने की इक्षा न रहे..
जब दुनिया वाले मुझे निकृष्ट लगने लगे..
जब मैं दिल खोल के सबको कोसने लगूं.
.
तब मेरी बात का बुरा न मानना
.
मुझे माफ़ कर देना...क्योंकि जब भी मैं हारा हुआ महसूस करता था,
तब तुम्ही अपने हाथों से मेरे सर को सहलाते थे..  मुझे दिलासा देते थे..
मेरी आँखों के आगे से पट्टी हटाते थे ..और दुनिया में विश्वास दिलाते थे..

मुझे माफ़ करना , मैंने  अपनों  के आँखों में आंसू भर दिया...उन्हें इतनी चोट पहुचाई , जिन्होंने मेरे लिए इतने दर्द सहे..जिन्होंने मेरे लिए वो सब कुछ किया....जिसके लायक मैं नहीं था... 
मुझे माफ़ करना , जब मैं अपनी सहज प्रवत्ति के कारण इतना बड़ा  पाप कर बैठू..
तब मुझे अपना लेना...मुझे माफ़ कर देना...क्योंकि तुम्हारे सिने से लग के मैं सुकून महसूस करता हूँ.
मुझे बिखरने से बचा लेना..मेरे दोस्त , मेरे भाई मैंने तुझे बहुत तकलीफ दी फिर भी मुझे बचा ले..
मुझे मेरे बचा ले ...मुझे इस पश्चाताप की आग से मुक्ति दे दे मुझे माफ़ कर दे ...मेरे प्यारे..मुझे माफ़ कर दे.. 

जब मुझे भी ऐसी  मोहब्बत हो जाये,,,तो मुझे माफ़ कर देना.

क्योंकि आज मेरा दिमाग ठीक है..पता नहीं कल जब कथित रूप से मुझे प्यार हो
और मैं आपको रुला के भी, खुद को सही कहूँ
तो मुझे माफ़ करना ,

आज की पीढ़ी ऐसे ही करती है...लेकिन मैं बुजुर्ग (बड़े) लोगों से विनती करता हूँ...की वे अपने प्यारों को प्यार करने दे...और छोड़ दे जिंदगी में कुछ सिखने को...जब वे लौटे तो उनका स्वागत करें...उन्हें विस्वास दिलाएं की वे उनके अपने हैं ....
क्योंकि प्यार वही होता है, जो लौट के आ जाये..
(रही बात प्रेमी युगल या ऐसी परिस्थिति में रहने वाले तो एक बार वे खुद का निरिक्षण जरुर करे...बाकि सारे जवाब तो उनका दिल दे देगा.....
और अगर मैंने कुछ गलत लिखा तो मुझे माफ़ करना...क्योंकि मेरा उद्देश्य पवित्र है..साधन कैसा है ये आप स्वयं तय करें..)..

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