Sunday, July 18, 2010

कर्तव्य हम निभाएंगे......

हमारी जंग उनसे है, जिन्हें हम प्यार करते हैं.
चाहते वो भी हमको हैं, पर वार हर बार करते हैं.
न जाने कौन सी शोहबत  में हैं, वो आजकल.
ऐसी हरकते जो बिना सोचे,  बार बार करते हैं..

सुना है उनको मिल गया है, प्यारा सा कोई रहगुजर..
उसके साथ ने उनको दीवाना बना दिया होगा, .
हमें मालूम  है मोहब्बत का जूनून....
यही सोचके उन्हें  माफ़  बार बार करते हैं....

हमारी ख़ामोशी को वो नादानी समझ बैठे हैं...
उन्हें अब क्या बताएं, हम सब समझ के बैठे हैं....
किसी दिन खुल गया जो मुंह, तो कयामत ही आयेगी...
खुदा कसम, उनके पांव तले से जमीं ही खिसक जाएगी.....

लड़ेंगे हम ये जंग भी, उतनी ही सिद्दत से...
कभी चाहा था उनको हमने, जितनी सिद्दत से...

अब लड़ेंगे उनसे हम, उनको भुला  के....
देंगे ये भी  इम्तहान,  हम खुद को भुलाके..

हमें तो अपनी नादानी ही प्यारी है..
ये दुनिया कि तरह रंग तो न बदलती...
शीशे के आगे जब भी होता हूँ हाजिर....
ये खुद से नजरे तो न चुराती है ....

हमें नाज है अपनी मोहब्बत पे..
समझ न सके वो , तो इस  दिल का क्या कसूर....

हम लड़ेंगे उनसे उनके हर वार  का जवाब भी देंगे...
कुछ इस तरह से उनके प्यार का जवाब भी देंगे..

मलहम कि जरुरत जो होगी कभी उनको..
उनके हबीब से पहले हमारा हाथ होगा उनके जख्मो पे...
कुछ इस तरह से मुहब्बत का क़र्ज़ हम चुकायेंगे...
अपना फर्ज  निभाएंगे, फिर गीत वही  गुनगुनायेंगे....

कुछ इस तरह से अपनी बदकिस्मती पे आंसू बहायेंगे...
कि दुनिया  वाले भी , खुद को रोने से नहीं रोक पाएंगे.......

कर्तव्य  हम निभाएंगे......कर्तव्य हम निभाएंगे........

1 comment:

Manish said...

अरे बाप रे!!

आपको मेरा सादर चरण स्पर्श!!
किधर दबा के बैठे थे यार??? सच में अपुन की भी स्टोरी डाल दी है इस कयामत में…