Saturday, July 3, 2010

एक छोटी सी प्रेम कहानी......

उनके वादों कि पहले सी अहमियत नहीं रही.
उनमे वो पहले सी मासूमियत नहीं रही.
ज़माने ने उनको भी बदलना सिखा दिया ,
उनको अब हमारी जरुरत नहीं रही..
लेकिन कैसे उनसे नफरत करले हम , हमें तो ये सिखाया ही नहीं कभी.......
आप हमें जो भी समझो लेकिन ये दिल फिर भी आपको खुश देखना चाहता है.............
हमने जब इसे समझाया तो बोल उठा.............
हम उनकी मोहब्बत में खुद को भुला देंगे,
खुद पागल बनकर के उनको सजा देंगे.
वो पास में हो कर के हमें बद्दुआ दे दें.
हम दूर भी जा कर के उनको दुआ देंगे......
आज उनसे फिर मुलाकात हो गयी.............
बड़ी मायूस थी वो, उनकी वो मासूमियत कहाँ गयी...
सिखाई थी जो हमें, वो नसीहत कहाँ गयी......
बड़े बेफिक्र थे वो, जब कारवां चले...
ढलते सूरज के साथ वो बेफिक्री कहाँ गयी........
लेकिन अब शायद वो सच को जानने और मानने लगे हैं..........
दुनिया के सच ने उन्हें ,रास्ता दिखा दिया...
भटके हुए पथिक को, मंजिल का पता दिया...
हैं आज भी वो अर्श पे ,पर धरती पे हैं कदम..
दुनिया ने उन्हें  दुनिया में, जीना सिखा दिया.......

ये पंक्तिया एक छोटी सी प्रेम कहानी जो पता नहीं प्रेम थी या महज आकर्षण.......लेकिन जो भी हो  आज दोनों को सत्य का ज्ञान है.और वे यथार्थ को अच्छे से समझते हैं ...........न तो वो देवदास कि तरह अपनी  जिंदगी बर्बाद करते हैं और न ही मजनू कि तरह भटकते हैं.........
बल्कि अपने प्यार पे गर्व करते हुए, एक दुसरे से शर्माए बिना एक अच्छे दोस्त कि तरह रहते हैं........क्योंकि दोनों ने एक दुसरे को इन्सान बना दिया,,,है...,,,,,,,,,
कुदरत का कहर था दिल टूटना मेरा  ,
 या दुनिया कि जरुरत थी दिल टूटना मेरा...
जो भी हुआ चलो अच्छा ही हुआ ..
एक पल को  हमें ये एहसास तो हुआ.....
संवेदना अभी भी जिन्दा है यहाँ .......सदियों के सवालों से जूझते हुए.....

उनका जीवन मानवता कि अमूल्य निधि बन गया.......और वे मानवता के प्रतिनिधि .......सो प्रेम कि हर बूंद का आनंद लीजिये और सीपी में मोती का निर्माण कीजिये............धैर्य और शुचिता के साथ............

3 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी पेशकश

Divya said...

ज़माने ने उनको भी बदलना सिखा दिया ,..

In the above line everything has been said beautifully.

we all are nothing in front of circumstances.

It is wise to live in present with things coming our way.

And do not doubt your love...It was indeed love !

Manish said...

बड़े भाई!! आज इलाहाबाद में फुर्सत से बैठ कर नि्हार रहा हूँ

मन के जितने वायर हैं सब हिला दिये :( :(