Thursday, June 3, 2010

"पापा को गुस्सा क्यों आता है "

कल शाम को ऑफिस से लौटते समय अचानक लगा की ....................
               थका हुआ शरीर खुद को बोझ महसूस हो रहा था............ऐसा लगा की जैसे खुद को ढो के ले जा रहे हों.........न तो हंसने का मन हो रहा था न ही बकवास करने का.............
                       लेकिन अपनी चिर परिचित आदत से मैं बच तो नहीं सकता न ,,,,,,,,,,,,सो अपनी समस्या को दूसरों की समस्या समझके उनको महसूस करने लगा और उनकी प्रतिक्रिया सोचने लगा............
एक पंक्ति  मन में आई "पापा को गुस्सा क्यों आता है "फिर विचारों का क्रम बंध गया,  अगर उसे कविता कहे तो शायद वो हो भी सकती  है.................
पापा को गुस्सा देखके बचपन में सोचता था, अक्सर मैं.
क्यों होते हैं इतने गुस्सा वो , न खेलना हो न खेले.
 बार बार पढने को कहके चिल्लाते हैं ऐसे क्यों ?
मेरे हर बात पे चिढ जाते हैं  ऐसे क्यों ?
गुस्सा और नफरत का बीज पड़ने लगे मन में जब.
मेरे हर क्यों का जवाब देने को होती  वहीँ पे माँ..
इतनी सहजता थी उसकी बातों में की हर गुस्सा छू हो  जाता था..
हर मतभेद, नफरत के बीज को का समूल नाश हो जाता था .......
उसकी कई बाते तो समझ में न आती थी,,,,
,पर न जाने क्यों  सुनना अच्छा लगता था...
लेकिन हर बार एक प्रण मैं दोहराता था ,,,,,,,कि जब  मैं बड़ा होऊंगा  ,
,बच्चों के साथ खूब खेलूँगा ,सबका ख्याल रखूँगा ,,
,पापा की तरह नहीं, केवल अपने में ही मस्त रहो ,
डांट डांट के  सबका  जीवन त्रस्त करो...........
घर से दूर आज देखता हूँ कि  , कोई समय भी पूछ ले तो झुंझलाहट होती है...
जी करता है फोड़ दू उसका सर.........
दिल्ली की बसों में छोटी सी बातों पे होती है तकरार.............
आज समझ में आता है  पापा को गुस्सा क्यों आता है.......
समाज के अपेक्षाओं को झेलके चलते रहे वो.......दुनिया कि जंग में अडिग, अटल
..फिर भी हम कोसते थे अपने भाग्य को.......ऐसे पापा न मिले कभी किसी को,,,,,,,
,लेकिन अब लगता है कितना चाहते थे वो हमें......
हमें दीखता था केवल अपना दुःख ,,केवल अपनी चिंता............
ये स्वार्थ था या बचपन...........नहीं जानता मैं ............
अब जानता हूँ पापा को गुस्सा क्यों आता था ?

( नोट :-जब तक व्यक्ति दूसरों की समस्याओं को न समझे तब तक वो बच्चा ही होता है.......और मुर्ख रहता है........जिस दिन समझ जाये उसी दिन बड़ा हो जाता है..................और तब वो मासूम होता है...........)