Saturday, March 6, 2010

हाले-दिल ना पूछो ............

हाले-दिल न पूछो , हमसे हमारा.
छोडो भी, नहीं काम अब ये  तुम्हारा,
हाले- दिल .............
आदत  तुम्हारी है, सबसे निराली ....
 लगती हमेशा हो, तुम भोली-भाली....
वो हसने-हँसाने की, आदत तुम्हारी
लगती है मुझको, वो कितनी प्यारी
लौटा लाओ वापस, समय वो हमारा
हाले -दिल ............
जानी हो जितना, तुम हमको अब   तक..
उससे भी आगे है, मेरा  फ़साना,
नहीं चाह   मुझको, है महलों की  प्यारी
तेरा साथ मुझको, लगता है प्यारा
हाले -दिल ना ....................
जनता हूँ सबकुछ, बताओ भले ना....
समझता हूँ तुमको,जताओ भले  ना...
चाहत तुम्हारी, अभी भी हमें है...
यादों ने तेरी, बहुत है रुलाया...
मगर और रोना नहीं, अब गवारा
हाले -दिल ना...................
भुलाकर तुम्हे हम, रहेंगे अब कैसे
दर्दे दिल भला अब,सहेंगे हम   कैसे
चाहत तुम्हारी ही, है मेरी पूजा

आता नहीं है, कोई काम दूजा.  
पर आंसू बहाना नहीं, अब गवारा
हाले दिल ना, पूछो हमसे हमारा......
कोई राह, ऐसी तो होगी जरुर......
ले जाये जो, हमको वहां तक.........
जहाँ तेरी हर ख्वाहिसे, होंगी  पूरी
मेरी कोई आरजू भी,  ना होगी अधूरी
 हँसना मेरा जो, तुझको पसंद है...
रोना मुझे भी नहीं, अब  गवारा....
हाले- दिल ना पूछो हमसे हमारा .......
तुम्हारी ख़ुशी की, हमें आरजू है
नहीं कोई और, अब  जुस्तजू है...
याद हमें है, वो हँसना तुम्हारा..
सलामत रहे, वो बचपन तुम्हारा..
हाले- दिल ना ..........................

1 comment:

Manish said...

kya baat hai...... kab se geetkaar ban gaye bhai??

bahut achchhi hai...