Tuesday, March 2, 2010

एक प्रार्थना.........

    माँ  हमको  इंसान  बना  दे , प्यारी  सी  संतान  बना  दे .
 सबके  दिल  में  बसने  वाले , तू  प्यारे  अरमान  जगा  दे .
माँ  हमको  इंसान  बना  दे ,,,.......
माँ  हमने  ये  जान  लिया  है , सच  को  अब  पहचान  लिया  है
क्षेत्रवाद  के  नारों  से  नहीं  सियासत  चलती  है .
भाषावाद के जहर पिलाकर , नहीं ख़ुशी कोई पलती है. 
नफरत के इस चक्रव्यूह में, मोहब्बत का पैगाम दिला दे
हमको इंसान ....
हमको सिन्धी न गुजराती, नहीं मराठा बनना है,
तेरी चरणों की राज में , हमको तो अब पलना है
माँ सबके दिल में फिर वो प्यारा हिंदुस्तान बना दे.
माँ हमको इंसान ................
राम ,कृष्ण ,गौतम की धरती पे हमने है जन्म लिया.
कर्ण ,दधिची ,जनक के किस्से सुनकर है बचपन ये पला
याद  हमें फिर भूला , वो गौरव औ सम्मान दिला दे. 
माँ हमको......
टैगोर , तिलक  औ गाँधी को अपना आदर्श बनायेंगे 
आजाद, भगत की क़ुरबानी को अब ना हम भुलायेंगे .
माँ तुझसे ये वादा है , अब ना तुझे रुलायेंगे 
जाती धर्म मजहब के नाम पे  नहीं खून बहायेंगे.
 बस हमको इंसान बना दे, प्यारी सी संतान बना दे.
माँ हमको इंसान बना दे............................

1 comment:

Manish said...

वाह भाई, क्या कविता हैं, वाकई अद्भुत......