Monday, February 15, 2010

बहन के विदाई के वक्त .........

विदाई , एक विरह का संकेत ....
जुदाई का प्रतिक ...... यह कैसा होता है ...इसका अनुभव मुझे पिछले दिनों हुआ ....
इससे पहेले मुझे लगता था कि मैं विशेष हूँ, मुझे इससे क्या फर्क पड़ता है। मेरी भावनाएं मर चुकी हैं॥ अध्यात्म के रस्ते में,ज्ञान के रास्ते में आंसुओं का कोई मोल नहीं होता। मेरे पापा अक्सर उदहारण देते कि राजा जनक अपनी बेटी कि विदाई पर रोते हैं॥ जिनके जैसा ज्ञानी उनके समय कोई नहीं था॥
प्यार में अक्सर क्यों होता है कि मिलन के साथ ही जुदाई जुड़ा होता है .... हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते
खैर , जो होता है अच्छे के लिए होता है.... मुझे मेरे अंदर कुछ खालीपन का एहसास होने लगा था, शेष दीदी के उस उदास चेहरे ने पूरी कर दी॥ मुझे अक्सर यह भय रहता था कि कहीं मेरे कारन पिता जी दीदी कि पढाई या फिर उनकी किसी आवस्यकता को मेरे आवस्यकता को पूरा करने के लिए छोड़ न दे। लेकिन साथ यह डर भी होता था कि वे जितना प्रयास कर रहे हैं मैं कहीं क्रांति का बिगुल बजा के उनके लिए समस्या न खड़ीकर दूं... जिससे कई बार मैं दीदी के विरोध में भी नजर आया॥ लेकिन आज मैं सर झुकाकरये कहना चाहता हूँ कि दीदी मैं आपके किसी बात को कभी टाल ही नहीं सकता आपको जब भी मेरी जरुरत होगी मैं वहां होऊंगा.... दीदी हो सकता है आज इसका कोई मोल नहीं हो , पर मैंने इसके लिए प्रयास ,और इसका एह्स्सास लखनऊ ट्रिप पर कर लिए था ......और तब से मैं अपनी गलती सुधरने के कोशिश कर रहा हूँ...
दीदी कि विदाई के समय दीदी का चेहरा देखकर वो आंसुओं का खुद बह जाना , तब पता चला कि मैं इतना भावुक हूँ ॥ इस बार घर से आते समय माँ का चेहरा भी बहुत दुखदायी था , साथही पिता जी का खुश दिखने का असफल प्रयास आँखों में आंसुओं को लाने के लिए पर्याप्त था॥
दुनिया में सबसे निरिह जीव कोई है तो वो स्त्री शारीर ही दिखाई पड़ता है॥ मुझे ये दुःख के साथ कहना पद रहा है॥ मैं सच्छी नहीं जनता लेकिन जो कुछ जीवन में देखा है उसी अधर पैर मैं यह कह रहा हूँ॥
मैं आप सबसे ये निवेदन करना चाहूँगा कि हम सबको ये प्रयास करना होगा कि हम खुशियाँ बत्तें और कमसे कम एक वक्ती के जीवन को खुशियों से भर दें॥
अरे यार शादी के बाद हम परिवार के लोग यदि एक -एक काम छोड़ दे तो उस लड़की पर काम का बोझ कई गुना बढ़ जाता है... हमें मानना होगा कि वो भी इंसान है...खैर ये मैं इसलिए नहीं कह रहा हूँ कि मेरी बहन कि शादी हो गई बल्कि इसलिए कि नारी मात्र के लिए उसके अधिकारों के लिए ..यह नितांत जरुरी है साथ ही अपनी ख़ुशी के liye भी . चलिए फिर लिखूंगा जब कोई भाव मन में उठेगा .....धन्यवाद....

1 comment:

riya said...

bahut badhiya , kalam ko rukne na de.......