Wednesday, January 27, 2010

mera dost

मेरा एक दोस्त है , था, नहीं कह सकता क्योंकि शरीर बदल लेने से भावनाएं नहीं बदला करती । आज जब किन्ही दोस्तों को मस्ती करते देखता हूँ तो बरबस उसका ख्याल आ जाता है।
वो था ही ऐसा, एकदम ताजा , अल्हड ,मनमौजी, धुन का पक्का उसे सनकी भी कहा जा सकता है। पर था बहुत प्यारा।
वो हमेशा अच्छाई खोज निकलता था वो भी भौतकीके नियम लगा कर ,आइये बताऊँ कैसे -----
जब कहीं गिर जाता तो कहता गुरुत्व केंद्र गड़बड़ है , एक पैर पर खड़ा होकर कहता देखो धरती पर कितना दाब डाल रहा हूँ । जब मैं उदास होकर कहता हम लोग कितने छोटे हैं , सामाजिक रूप से ,कुछ नहीं के बराबर कुचल दिए जायेंगे तो वो कहता एक कण में इतनी उर्जा है कि पूरी दुनिया को बदल के रख दे , और तुम इतने द्रव्यमान को लेकर कहते हो छोटे हो..............
एक तिनका ही काफी है डूबते को बचाने के लिए, एक दिया ही काफी है अँधेरा मिटाने के लिए
क्यों सोचते हो इतना छोटा खुद को , तुम अकेले काफी हो धरती को बचाने के लिए .
और जब मैं भी हूँ तो डर किस बात का प्यारे ,हम काफी है दुनिया को हंसाने के लिए.....
इसलिए मैं उसे कभी था नहीं कहता क्योंकि उसने मेरे सोच को दिशा दी , हिम्मत और जोश दिया साथ ही कुछ कर गुजरने कि ललक दी ....
इसलिए हर वो व्यक्ति जो अच्छा सोचता है ,अच्छा करना चाहता है मुझे अपने दोस्त कि याद दिलाता है।
फिर उम्र और रिश्ते मायने नहीं रखते.......................

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